शनिवार, 27 मई 2017

यक्ष प्रश्‍नों का जवाब दिए बिना पुलिस ने “मयंक चेन” पर हुए मर्डर व लूट को खोलने का किया दावा

मथुरा। एक मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आज आधा दर्जन बदमाशों को पकड़कर ज्‍यूलिरी फर्म ”मयंक चेन” पर हुए डबल मर्डर व करोड़ों रुपए की लूट के पर्दाफाश का दावा किया है।
15 मई की रात करीब साढ़े आठ बजे शहर के मध्‍य कोयला वाली गली में स्‍थित मयंक चेन नामक ज्‍यूलिरी फर्म पर आधा दर्जन सशस्‍त्र बदमाशों ने धावा बोला और अंधाधुंध गोलीबारी करके विकास एवं मेघ अग्रवाल की हत्‍या कर दी तथा विकास के भाई मयंक सहित तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
बदमाश यहां से करोड़ों रुपए मूल्‍य का सोना तथा लाखों रुपए नकद ले जाने में सफल रहे।
 घटना  से  जुड़ा  बीडियो  यहां  देखें - 

 https://youtu.be/5ESX391bTU4


बदमाशों द्वारा की गई यह दुस्‍साहसिक वारदात दुकान के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई किंतु अधिकांश बदमाशों के चेहरे कपड़े व हैलमेट से ढके होने के कारण उनकी पहचान करना मुश्‍किल हो रहा था।
हमलावर बदमाशों में से एक का चेहरा आधा खुला था। पुलिस का दावा है कि वही कुख्‍यात ईनामी अपराधी राकेश उर्फ रंगा है, जो गैंग का सरगना भी है।
रंगा का एक अन्‍य भाई बिल्‍ला हत्‍या के दूसरे मामले में काफी समय से जेल के अंदर निरुद्ध है।

रंगा और बिल्‍ला के नाम से कुख्‍यात यह दोनों भाई सबसे पहले तब सुर्खियों में आए जब करीब डेढ़ दशक पूर्व इन्‍होंने होलीगेट के अंदर भीड़ भरे छत्ता बाजार से आर के ज्‍वैलर्स के कर्मचारी को गोली मारकर भारी मात्रा में सोने के जेवरात व नकदी लूट ली।
दीपावली से ठीक दो दिन पहले की गई इस लूट के बाद भी शहर में काफी हंगामा हुआ था। रंगा-बिल्‍ला पकड़े तब भी गए थे और पुलिस ने इनके कब्‍जे से लूट का पूरा माल बरामद होने की बात भी कही थी किंतु बताया जाता है कि अधिकांश माल की बरामदगी नहीं हो सकी क्‍योंकि पीड़ित सर्राफा व्‍यापारी ने अंत तक अपने नुकसान का ब्‍यौरा पुलिस को नहीं दिया।
इसके बाद इन दोनों भाइयों ने एक मामूली सी बात पर अपने पड़ोसी भूलेश्‍वर चतुर्वेदी को समझौते के बहाने घर बुलाकर उसकी हत्‍या कर दी। बाद में भूलेश्‍वर के बड़े भाई तोलेश्‍वर उर्फ तोले बाबा को भी तब मार दिया गया जब वह भूलेश्‍वर के केस की पैरवी के लिए कचहरी जा रहा था। हत्‍या के इन्‍हीं मामलों में रंगा का भाई बिल्‍ला इन दिनों मथुरा जिला कारागार में बंद है।
इस रंजिश के चलते रंगा-बिल्‍ला के चाचा विजय को भी चौबिया पाड़ा क्षेत्र में मार दिया गया था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राकेश उर्फ रंगा पर फिलहाल एक दर्जन संगीन मामले दर्ज हैं साथ ही 15 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित है।
पुलिस का दावा है कि पकड़े गए बदमाशों में शामिल कुख्‍यात ईनामी बदमाश राकेश उर्फ रंगा ही वह शख्‍स है जो मयंक चेन से प्राप्‍त सीसीटीवी फुटेज में प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है।
रंगा के साथ पुलिस ने उसके दो छोटे भाई नीरज एवं चीनी उर्फ कामेश को भी पकड़ा है। गिरफ्त में आए बाकी तीन बदमाशों के नाम आयुष, विष्‍णु उर्फ छोटे तथा आदित्‍य बताए गए हैं।
बताया जाता है कि पुलिस से मुठभेड़ में नीरज गंभीर रूप से घायल हुआ है और उसे गोली लगी है तथा रंगा व चीनी भी घायल हैं।
पुलिस ने इनके कब्‍जे से 20 लाख रुपए मूल्‍य के सोने व हीरे के आभूषण तथा असलाह और मय सिम कार्ड मोबाइल की बरामदगी दिखाई है।
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले नकाबपोश बदमाश यही थे, इसका पता तो फुटेज की फॉरेंसिक जांच के बाद ही लगेगा अलबत्ता पुलिस ने इस बावत बुलाई गई अपनी प्रेस वार्ता में ऐसी कोई जानकारी नहीं दी कि बदमाशों के कब्‍जे से बरामद माल 16 मई को मयंक चेन के पड़ोसी सर्राफ के यहां से मिले माल से अलग है। यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि पुलिस को अब तक पीड़ित व्‍यापारियों ने लूट के माल का कोई ब्‍यौरा नहीं दिया और न ही एफआईआर में इसकी कोई जानकारी दी गई थी।
गौरतलब है कि 16 मई को बरामद वह माल पांच व्‍यापारियों की कमेटी के सामने सीओ सिटी जगदीश सिंह ने मृतक व्‍यापारी मेघ अग्रवाल के पिता को इस शर्त पर सौंप दिया था कि इसे बरामदगी मानते हुए पुलिस की जरूरत के हिसाब से प्रस्‍तुत किया जाएगा।
इसके ठीक विपरीत व्‍यापारियों का कहना था कि उस माल के मिलने में पुलिस की कोई भूमिका नहीं थी। उसे पड़ोसी सर्राफा व्‍यापारी ने व्‍यापारियों को दिया था लिहाजा उसे बरामदगी नहीं माना जा सकता।
पुलिस द्वारा रंगा गैंग से दिखाई जा रही 20 लाख रुपए मूल्‍य की बरामदगी का कोई विस्‍तृत ब्‍यौरा न दिए जाने और आज सुबह ही मेघ अग्रवाल के पिता महेश अग्रवाल द्वारा यह कहे जाने कि उनके ऊपर पुलिस सौंपे गए माल को देने का दबाव बना रही है, यह संदेह होना स्‍वाभाविक है कि पुलिस जिसे रंगा गैंग से बरामद माल बता रही है वह कहीं मेघ अग्रवाल के पिता को सौंपा गया माल ही तो नहीं है।
यदि ऐसा है तो पुलिस के पास बरामदगी के नाम पर रह क्‍या जाता है और कोर्ट में पुलिस का यह गुडवर्क पीड़ित को कितनी राहत दिला सकेगा।
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले चेहरों से पकड़े गए बदमाशों की शिनाख्‍त पर भी लोग उंगली उठा रहे हैं। बहुत से लोगों का लग रहा है कि जो आधे या पूरे खुले चेहरे सीसीटीवी की फुटेज में दिखाई दे रहे हैं, उनसे पकड़े गए बदमाशों का चेहरा हूबहू मेल खाता नजर नहीं आता।
बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि रंगा-बिल्‍ला के नाम से मशहूर चार भाइयों के इस गैंग की इलाके में भारी दहशत थी और आम आदमी तथा व्‍यापारी इनसे खौफ खाते थे। आसपड़ोस में भी इन्‍होंने आतंक फैला रखा था।
यही कारण है कि न सिर्फ शहर के लोगों ने बल्‍कि आस-पड़ोस के लोगों ने भी इनके पकड़े जाने पर राहत की सांस ली है और चौबिया पाड़ा क्षेत्र में जश्‍न का माहौल बना हुआ है।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी
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